How can anxiety or worry affect your health?-एंजाइटी या चिंता आपके स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित कर सकती है?

जब हमारा मस्तिष्क किसी विषय में एक जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है | यानी कि जब कोई विशेष बात हमारे मन को एक हद से ज्यादा प्रभावित करने लगती है, तो धीरे-धीरे वह हमारी कार्यक्षमता को भी प्रभावित करना शुरू कर देती है | चिंता का विषय हमारे जीवन से संबंधित कोई भी चीज हो सकती है| रोजमर्रा के जीवन में हम कई प्रकार की परिस्थितियों से गुजरते हैं| जिनसे हमारा मस्तिष्क बहुत ज्यादा प्रभावित होता है |कभी-कभी कुछ ऐसे विषय होते हैं जिन्हें लेकर हम बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं| और उनके बारे में अत्यधिक सोच विचार करना चिंता का कारण बन जाता है|

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 कुछ सामान्य से कारण जो मन में चिंता उत्पन्न कर सकते हैं वह निम्न प्रकार होते हैं |

  • काम को लेकर चिंता

 ऑफिस या घर के कामकाज को लेकर होने वाला तनाव और चिंता सबसे ज्यादा सामान्य रूप से पाए जाते हैं| अक्सर ऐसा देखा जाता है कि नौकरी पेशा व्यक्ति अपने कार्यस्थल पर अपने सहकर्मियों के साथ संबंधों को लेकर काफी हद तक चिंतित और संवेदनशील रहते हैं |वहीं दूसरी तरफ ऑफिस या कार्यस्थल पर कार्य का तनाव भी सामान्यतया देखने में मिलता है| दूसरी तरफ अगर उन लोगों की या महिलाओं की बात करें जो घर में रहती है और घर के काम का संभालती है |वह अपने परिवार और घर के कामकाज को लेकर काफी हद तक चिंतित रहती है |एक सीमा तक यह चिंता और तनाव स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता| लेकिन जब यह चिंता आपके रोजमर्रा के जीवन को और आपके कार्य करने के तरीके को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने लग जाए तो समझ जाइए कि आपको इसके बारे में सोचने की जरूरत है| और समय रहते इसका इलाज करवाना बेहद आवश्यक है|

  •  व्यक्तिगत संबंधों को लेकर होने वाली चिंता

 परिवार में पति- पत्नी, बच्चों और माता-पिता या फिर अपने आसपास रहने वाले लोगों के साथ सामाजिक संबंधों को लेकर होने वाली चिंता भी एक सामान्य श्रेणी है| इसके अंतर्गत व्यक्ति अपने करीबी लोगों के साथ संबंधों को लेकर एक हद से ज्यादा सोच विचार करने लगता है| उसे हर पल दिमाग में यह डर सताता है कि उसके कुछ भी कहने का सामने वाले पर क्या असर होगा? या उसके किसी भी कार्य से उससे संबंधित व्यक्ति किस तरह प्रभावित होगा? धीरे-धीरे इस प्रकार की चिंता प्रवृत्ति बन जाती है| जो कि बाद में जाकर शारीरिक समस्याओं के रूप में सामने आती है |

  • आर्थिक चिंता 

आर्थिक चिंता भी 70% व्यक्तियों में पाए जाने वाली चिंता का प्रमुख कारण है | ज्यादातर लोग नौकरी और पैसे कमाने को लेकर अत्यधिक सोच विचार करते हैं |उनके मस्तिष्क में यह विचार बहुत तेजी से चलता रहता है कि उनके परिवार का पालन पोषण किस तरह होगा| नौकरी में तरक्की को लेकर और अधिक पैसे कमाने को लेकर पैदा होने वाला तनाव कई बार बेहद हानिकारक रूप में सामने आ जाता है |

  • बीमारियों या शारीरिक समस्याओं से उत्पन्न चिंता

 जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक किसी बीमारी से जूझ रहा होता है अथवा अगर बार-बार वह किसी रोग से ग्रसित हो जाता है ,तो शारीरिक समस्या से उत्पन्न चिंता उसके लिए बेहद कष्टदायक होती है | बीमारियों से उत्पन्न चिंताएं एक व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है | वहीं दूसरी तरफ बीमारियों के इलाज में होने वाले खर्चे के कारण भी व्यक्ति का मस्तिष्क काफी हद तक प्रभावित होता है |शारीरिक समस्याएं और बीमारियां व्यक्ति के शरीर और मन दोनों को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है |और तनाव उत्पन्न करने का प्रमुख कारण बनती है |

चिंता होने की परिस्थिति में आप कैसा महसूस करते हैं ?

 जाहिर सी बात है जब हम किसी चीज को लेकर के बहुत परेशान होते हैं ,तनावग्रस्त होते हैं, तो हम अपने दैनिक जीवन के कार्यों को करने में भी कठिनाई महसूस करते हैं | क्योंकि तनाव हमारे मस्तिष्क के साथ-साथ हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है |

  • चिंता होने की स्थिति में व्यक्ति सबसे पहले जो लक्षण महसूस करता है वह है बेचैनी | किसी भी विषय के बारे में चिंता होने पर व्यक्ति के हाव भावों में बेचैनी नजर आने लगती है |एक जगह पर स्थिर रूप से ना बैठ पाना | यहां वहां टहलना ,तेज कदमों से बिना किसी कारण के ही इधर-उधर चलना | यह कुछ ऐसे शारीरिक लक्षण होते हैं जो व्यक्ति के अंदर उत्पन्न हो रही बेचैनी को दर्शाते हैं | सीधे-सीधे कहा जा सकता है कि चिंता युक्त व्यक्ति अपने आप में काफी बेचैनी महसूस करता है |
  • दूसरा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लक्षण है तनाव | जब कोई भी व्यक्ति किसी विषय को लेकर अत्यधिक चिंतित होता है ,तो उसे तनाव महसूस होता है| तनाव युक्त व्यक्ति का किसी भी कार्य में मन नहीं लगता| उसके चेहरे पर दुख के भाव नजर आते हैं | किसी भी कार्य को करने में उसे खुशी महसूस नहीं होती | सिर में भारीपन होना और नींद ना आना | यह कुछ तनाव के महत्वपूर्ण लक्षण है यानी कि अगर आप ऐसा कुछ महसूस कर रहे हैं तो सतर्क हो जाइए एक चिंता युक्त व्यक्ति भी इस तरह के लक्षणों को महसूस करता है|
  •  तीसरा महत्वपूर्ण लक्षण है खतरा महसूस करना यानी कि पैनिक होना जिस विषय के बारे में हम बेहद चिंतित हैं उस विषय को लेकर हमें बार-बार खतरे की स्थिति महसूस होती है | उदाहरण के लिए अगर हम अपने कार्यस्थल की किसी बात से चिंतित है तो हमें शायद हमारी नौकरी चली जाएगी या फिर कार्यस्थल पर हमें अपमान महसूस करना पड़ेगा| और इस तरह का खतरा महसूस करना |चिंतित व्यक्ति की निशानी है |
  • -चौथा प्रमुख लक्षण है पारस्परिक संबंधों को लेकर उत्पन्न तनाव | मान लीजिए कि आप किसी व्यक्ति के साथ पारस्परिक संबंधों को लेकर काफी चिंता में है | उस स्थिति में आपको बार-बार उस व्यक्ति के साथ संबंधों के खराब होने या संबंधों के टूट जाने का डर सताता रहता है | धड़कन बढ़ना चिंता की स्थिति से गुजर रहे व्यक्ति की धड़कन अपने आप ही तेज हो जाती है क्यों की धड़कन बढ़ने का सीधा संबंध तनाव और चिंता से होता है| धड़कन का बढ़ना भी चिंतित होने की एक प्रमुख निशानी है धड़कन का बढ़ना एक ऐसा लक्षण है जो व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं होता है क्योंकि यह शरीर की एक स्वतः  होने वाली क्रिया है |
  • डायरिया या कब महसूस करना | कुछ व्यक्तियों में ऐसा देखा जाता है कि जब वह किसी बात को लेकर अत्यधिक चिंतित होते हैं तो उन्हें डायरिया या कब्ज होने के लक्षण नजर आने लग जाते हैं | यानी कि पाचन तंत्र में गड़बड़ी होना भी चिंतित स्थिति की एक निशानी है |
  • चिंतित होने की अवस्था में कमजोरी और थकान महसूस करना भी एक आम बात है चिंता की स्थिति से गुजर रहा व्यक्ति किसी भी कार्य को करने में काफी थकान महसूस करता है | क्योंकि वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होता|  सीधे-सीधे कहा जा सकता है कि चिंता आपकी मानसिक क्षमता को भी कम कर देती है | 

सारांश

 अगर ऊपर लिखे गए किसी भी लक्षण को आप लंबे समय से महसूस कर रहे हैं, तो आपको सावधान होने की जरूरत है|  हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में किसी बात को लेकर परेशान होना तनाव होना या चिंतित होना एक सामान्य सी बात है | लेकिन जब यह लक्षण कुछ सप्ताह से बढ़कर महीने और महीने से बढ़कर साल में तब्दील हो जाए तो उस स्थिति में हमें डॉक्टर से सलाह लेना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है| कई बार चिंता युक्त व्यक्ति को इन लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं जो कि बाद में बड़ी शारीरिक समस्याओं के रूप में सामने आते हैं किसी भी विषय के बारे में सोच विचार करना सामान्य बात है लेकिन एक हद से ज्यादा सोच विचार आपको एंजाइटी या चिंता के डिसऑर्डर की तरफ धकेल सकते हैं इसलिए सावधान रहें और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें


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