ब्रेस्ट कैंसर क्या है? यह कैसे होता है?

ब्रेस्ट कैंसर क्या है

माना बीमारी गंभीर है और मध्यवर्गीय परिवार अपनी जरूरत का सामान लाने में असमर्थ है तो उसके लिए यह एक जटिल समस्या है क्योंकि आंकड़ों के अनुसार भारत में स्तन कैंसर के इलाज पर सालाना 85600 डॉलर खर्चा आ जाता है जो मध्यमवर्गीय परिवार के लिए खर्च कर पाना मुश्किल है जिसके कारण वह इस कार्य को अधूरा छोड देते है जिससे 80%महिलाएं अपनी जान गंवा देती है, लेकिन यह क्या है कैसे होता है इसके क्या कारण है क्या लक्षण है और क्या समाधान है इसके बारे में जानने से पहले यह क्यों और कैसे फैलता है यह जानना अति आवश्यक है - 

ब्रेस्ट कैंसर स्तन से संबंधित एक बीमारी है जिससे स्तन कैंसर के नाम से भी जाना जाता है यह पुरुष और महिला दोनों में हो सकता है लेकिन इससे अधिकतर महिलाएं पीड़ित हैं। 

breast cancer stage ichhori


स्तन कैंसर स्तन कोशि काओंकी अनि यत्रिंत्रित बढ़ोतरी है।ये कोशिकाएं आमतौर पर ट्यूमर बन जाती है जिन्हें एक्स- रे में देखा जा सकता है 

जिसके प्रमुख कारण है- 

1. शराब का सेवन 

2. मोटापा 

3. धूम्रपान 

4. अक्सर देर रात तक या नाइट शिफ्ट में काम करना 

5. व्यायाम की कमी 

6. तैलीय चीजें अधि क खाना 

7. फल तथा सब्जि यां कम खाना 

8. रसायनों और विकिरणों के संपर्क में अधिक रहना इत्यादि 

स्तन कैंसर के लक्षण यदि समय रहते पता चल जाए तो इससे निजात पाया जा सकता है अन्यथा प्रति 8 घंटे  में महिलाओं की मौत हो जाती है। 

स्तन कैंसर के लक्षण - 

1.स्तन में गांठ या मस्से 

2. पूरे स्तन या किसी हिस्से में सूजन 

(त्वचा का मोटा होना, जलन, त्वचा की बनावट में बदलाव आना) आदि लक्षण यदि दिखाई दे तो यह स्तन कैंसर होने के संकेत हैं। 

4. स्तन की त्वचा में बदलाव 

5. निप्पल में बदलाव 

6. अंडरआर्म्स में गांठ 

ब्रेस्ट कैंसर कितने प्रकार का होता है - 

ब्रेस्ट कैंसर मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, 

1. डक्टल कार्सि नोमा इन सीटू - यह स्तन कैंसर का सामान्य प्रकार है। 

2. इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा - इससे सामान्यतः 80% महिलाएं प्रताड़ित है इस प्रकार का कैंसर डक्ट वॉल से होते हुए ब्रेस्ट के चर्बी वाले हि स्से तक फैल जाता है। 

3. इनवेसिव लॉबुलर कार्सिनोमा - इस कैंसर को ILC के नाम से भी जाना जाता है। 

महिलाओं में पाये जाने वाले इन ब्रेस्ट कैंसर के अलावा में टयूबलर कार्सिनोमा, मेडयुलरी कार्सिनोमा, म्यूकस कार्सि नोमा, लॉबुलर कार्सिनोमा जैसे कई अन्य प्रकार के कैंसर होते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर के स्टेज - 

स्टेज 0 - कैंसर के इस स्टेज में दूध बनाने वाले टिश्यू या डक्ट में बना कैंसर वहीं तक सीमित हो और शरीर के किसी अन्य हिस्से तक न पहुंचा हो। 

स्टेज 1 - इसमें टिश्यू का विस्तार होने लगता है और स्वस्थ टिश्यू को प्रभावित करने लगता है।यह ब्रेस्ट के फैट टिश्यू तक फैल हो सकता है और ब्रेस्ट के कुछ टिश्यू नजदीकी लिंफ मोड़ में भी पहुंच सकते हैं। 

स्टेज 2 - इस स्तर का ब्रेस्ट कैंसर अन्य हिस्सों तक फैलता है। 

स्टेज 3 - इस स्टेज में यह कैंसर हड्डियों तक फैल जाता है इसके अलावा बाहों के नीचे 9 से 10 लिंफ मोड में तथा कॉलर बोन में इसका हिस्सा फैल चुका होता है। 

स्टेज 4 -इस स्टेज में यह कैंसर लिवर, हड्डियों तथा दिमाग तक फैल चुका होता है। 

आमतौर पर इसे "सी" शब्द से परिभाषित किया जाता है । महिलाओं के लिए स्तन कैंसर एक बड़ी समस्या है वैसे तो स्तन कैंसर बढ़ती उम्र की महिलाओं को भी ज्यादा होता है 

लेकिन यह पुरुषों को भी हो सकता है। पुरुषों में 1% ही स्तन कैंसर होता है जिसके कारण यह है कि पुरुषों में स्तन का विकास नहीं होता। स्तन का मुख्य काम स्तनपान होता है। पुरुष और महिलाओं में स्तन के विकास के हार्मोन अलग-अलग होते हैं। पुरुषों में स्तन कैंसर बहुत ही एडवांस होता है और ये बहुत तेजी से फैलता है।स्किन से तेज़ी से फैल कर छाती से चिपक जाता है। इसलिए पुरुषों को भी इसके प्रति सजग रहना चाहिए। 

रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश, चीन, मलेशिया, कतर, यूएई, सऊदी अरब आदि देश अपने नागरिकों को मुफ्त या 75 से 80 फीसदी रियायत दरों पर कैंसर की दवा उपलब्ध करा रहे हैं रिपोर्ट में भारत को इस सूची से अलग रखा गया है क्योंकि स्तन कैंसर जागरूकता के शोध में पाया गया है कि महिला स्वास्थ्य सेवाओं तक नहीं पहुंच पाती है और पुरुष डॉक्टर से परामर्श करने में संकोच करते हैं 

जिसके कारण स्तन कैंसर से इलाज में देरी होती है और हजारों महिलाओं इसका शिकार हो जाती है और अपनी जान गंवा देती है। 

और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अन्य सभी कैंसर की तुलना में 2030 तक स्तन के कैंसर से भारत में सर्वाधिक महिला की मृत्यु होगी। 

इसलि ए अधि कांश वि कसि त और वि कासशील देशों में जागरूकता फै लाने के लि ए बहतु कु छ करना चाहि ए साथ ही जि न महि लाओंके स्तन कैंसर का पारि वारि क इति हास है 

उनके पास लगातार मैमोग्राम होना चाहिए। 

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में खर्च - 

शुरुआती स्तन कैंसर के इलाज पर होने वाला खर्चा भारत और दक्षिण अफ्रीका में यहां के लोगों के 10 वर्ष की औसत कमाई के बराबर बैठता है। वहीं अमेरिका में 1.7 साल की कमाई इस इलाज पर खर्च हो जाती है। तथा देश में स्तन कैंसर से 2018 में 87090 महिलाओं की मृत्यु हुई है। 

इसका सबसे बड़ा नुकसान मध्यमवर्गीय परिवार को चुकाना पड़ता है क्योंकि उनके पास इतना धन नहीं होता न ही कोई ऐसी तकनीक जिसके कारण वहां मृत्यु का कहर अत्यधिक बढ़ता जा रहा है। 

लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए एक नयी दवा की घोषणा की है। इससे दुनिया भर की महिलाओं को इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए सस्ता इलाज मिलना संभव हो पाएगा। इस दवा का नाम ( टै ्स्टूजुमाब) है यह एक बायोसिमिलर दवा है। 

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 1 स्टेज के कैंसर से लड़ने में यह दवा कारगर है साथ ही साथ कुछ के सेज में देखा गया है कि आडवं ास स्टेज के ब्रेस्ट कैंसर में यह दवा काफी उपयोगी साबित हुई है। 

WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस घेब्रेयेसस का कहना है कि यह दवा दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक गुड न्यूज है।

क्योंकि गरीब देशों में महंगा ी दवाइयों के कारण इलाज काफी महंगा होता है। 

साथ ही ब्रेस्ट कैंसर को रोकने के लिए या उसके खतरे को कम करने के लिए होम्योपैथिक उपचार भी उपलब्ध है हालांकि इससे ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम नहीं किया जा सकता पर लेकिन जीवन की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती हैं। क्योंकि इसके उपचार से पेन किलर दवाइयों और अन्य दवाइयों का इस्तेमाल करने की जरूरत कम होती है। 

इसलिए ब्रेस्ट कैंसर के मरीज यो के लिए होम्योपैथी एक अच्छा उपचार है।जिसे मुख्य इलाज के साथ लिया जा सकता है। ब्रेस्ट कैंसर के लिए उपयोग की जाने वाली कुछ आम दवाएं है

1.पल्सेटि ला 

2.कोनियम 

3.कार्सि नोसि नम 

4.स्टैफि साग्रि या 

5.थूजा 

6. सेपि या 

7. बैरीटा आयोडाटा इत्यादि है। ये दवाएं कैंसर के शुरुआती चरणों के लिए या उन लोगों के लिए बहुत असरदार साबित होती है जिन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने का आम खतरा है। 

दवाइयों के साथ ही कुछ काम हमें भी करने चाहिए जैसे - 

स्वस्थ और पौष्टिक आहार लें। 

दर्द होने पर व्यक्ति को खाने पीने की वो चीजें दे जो उसको खाने का मन हो। 

खुली हवा में एक्सरसाइज करें जि ससे मन शांत हो 

क्योंकि दवाएं तो अपना असर समय के साथ दिखाएं ी लेकिन ज्यादातर के सेज में देखा जाता है मरीज अपनी बीमारी को लेकर ज्यादा स्टै ्स ले लेता है जि ससे दवाईया कभी कभी नेगेटिव असर भी कर देती है इसलिए मरीज को अपने खानपान पर अधिक ध्यान देना चाहिए और मन को शांत रखना चाहिए।




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