main Pregnant kyon nahin ho pa rahee hoon aur isake kya kaaran hain?- मैं गर्भधारण क्यों नहीं कर पा रही हूं और इसके क्या कारण हैं?

प्रिया इन दिनों काफी परेशान है। लोग बात बात पर उसे ताने देने से बाज़ नहीं आते। 'नौकरी के चक्कर में गृहस्थी पर ध्यान नहीं दिया। उम्र पैंतीस की हो चली। इस उम्र में तो हमारे 3-3 बच्चे हो गए थे!' ऐसी कई बातें उसके कानों से हो कर हर रोज़ गुज़रती हैं। व्यक्तित्व तौर पर अब प्रिया स्वयं भी मातृत्व का रसास्वादन करना चाहती है। इसके लिए वह चिकित्सकों से परामर्श भी लेती है ताकि उसका गर्भ ठहर सके। प्रिया का मामला अनोखा नहीं है। आजकल कई महिलाएं इस समस्या का वज्रपात झेल रही हैं।


कहते हैं माँ बनना एक महिला के लिए सर्वश्रेष्ठ अनुभूति है। इससे उसके व्यक्तित्व को संपूर्णता मिलती है। परन्तु आजकल गर्भ धारण न कर पाने की समस्या आम होती जा रही है। इस संवृति के पीछे कई कारण निहित हो सकते हैं।



माना जाता 22-28 वर्ष की उम्र माँ बनने के लिए सबसे उपयुक्त है। किन्तु आजकल महिलाएं भी एक स्थायी और व्यवस्थित आजीविका का लक्ष्य रखती हैं और स्वयं को केवल पारिवारिक बंधनों एवं जिम्मेदारियों तक ही सीमित नहीं रखना चाहतीं। इसलिए परिवार को आगे बढ़ाने का निर्णय किसी निश्चित आयु तक ही लिया जाए ये जरूरी नहीं। पर गर्भधारण अगर उचित उम्र पर न हो तो ये भी परेशानी का सबब बन सकता है। ऐसा जरूरी नहीं कि कोई गंभीर रोग ही कंसीव करने अर्थात गर्भधारण में बाधक होता है, कभी-कभी जीवनशैली का ठीक ना होना भी इसका एक प्रबल कारक है।



आइए प्रकाश डालते हैं कुछ बिन्दुओं पर,जो इस समस्या के कारण से जुड़े हैं:


1. स्लीप साईकल या पैटर्न

पर्याप्त नींद हमारी प्रतिरोधक क्षमता के लिए अत्यंत आवश्यक है। तनाव महिलाओं के मासिक धर्म पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसका सीधा असर गर्भधारण पर होता है। इसलिए जरूरी है न्यूनतम आठ घंटे की नींद लेने की।


2. वजन

अमूमन लोग इस तथ्य से परिचित नहीं होते, परन्तु वजन गर्भधारण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कंसीव करने की क्षमता पर अत्यधिक वजन या पतलापन असर डालता है। फर्टिलिटी और पीरियड्स को सुचारु रूप से चलने में ये व्यवधान उत्पन्न करता है।  

योगा व व्यायाम को नियमित रूप से व्यवहार में लाना कारगर सिद्ध होता है। 


3. तनाव

तनाव प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालता है। पुरूषों में तनाव स्पर्म काउंट में कमी उत्पन्न करता है वही महिलाओं में मासिक चक्र पर बुरा असर डालता है। इससे(तनाव) से निवारण के लिए ध्यान कर सकते हैं।


4. प्रदूषण 

प्रदूषण स्त्री व पुरुष, दोनों की प्रजनन क्षमता पर बुरा प्रभाव डालता है। साथ ही साथ कार्सिनोजन,सिगरेट के धुएं आदि भी महिलाओं की फर्टिलिटी पर दुष्प्रभाव डालते हैं।


5. अंतःवस्त्र

यह सुनने में अटपटा लगेगा पर अंतःवस्त्र यानि अंडरगार्मेंट्स भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। बॉडी शेपर आदि पहनने प्रजनन अंगों पर नकारात्मक असर होता है। अगर आप माँ बनने के लिए प्रयासरत हैं तो आरामदायक कपड़ों को अपनी आलमारी में शामिल करें।\


6. संभोग 

बहुत ज्यादा या कम संभोग करना भी प्रजनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालता है। ओव्युलेशन के समय संभोग न करने पर भी गर्भधारण में दिक्कतें आती है।


प्रजनन में अक्षमता (इनफर्टिलिटी) है क्या:


जब असुरक्षित यौन संबंध भी गर्भधारण करवाने में असफल होता है तो संभवतः इनफर्टिलिटी की समस्या होती है। देखा गया है कि 85% जोड़े असुरक्षित संबंध (यौन) बनाने से प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण कर लेते हैं।  मगर उम्र अधिक माँ बनने की संभावना क्षीण होने लगती है। अमूमन 36 से ऊपर की उम्र की महिलाओं को प्रजनन संबंधी परेशानियों से निपटने के लिए चिकित्सक से अनिवार्य रूप से परामर्श लेना चाहिए। इनफर्टिलिटी को इस प्रकार वर्गीकृत किया सकता है:

प्राइमरी इनफर्टिलिटी: गर्भधारण में परेशानी, प्रथम संतान को उत्पन्न करने में।

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी: जब व्यक्ति को दोबारा गर्भधारण में समस्या होने लगती है। 

महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म, फैलोपियन नलियों में रूकावट का होना, एंडोमेट्रियोसिस आदि परेशानियों का सबब बन सकते हैं। कुछ मामले ऐसे भी हैं जो समझ नहीं आते हैं। 

 वैसे प्रजनन क्षमता के लिए कुछ इलाज़ भी उपलब्ध हैं:

.इंट्रयूटेरायिन इनसेमिनेशन या इन विट्रो फर्टिलाजेशन  गर्भधारण में सहायक हो सकते हैं। यद्यपि ये सफल होगा ही ऐसा कहा नहीं जा सकता।

.एंडोमेट्रियोसिस का एक सजग इलाज ।

. ओव्यूलेशन की नियमितता के लिए इलाज़ ।



स्त्रियों में इनफर्टिलिटी कुछ हद तक उम्र से भी जुड़ी होती है। प्रजनन क्षमता में सबसे अधिक कमी तीस से चालीस वर्ष की उम्र के बीच आती है। आंकड़ों के हिसाब से 35 साल 95% महिला तीन वर्ष के असुरक्षित यौन संबंधों से गर्भधारण कर सकती हैं पर 38 वर्ष की 75% महिलाएं ही ऐसा कर पाती हैं। 

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन भी इनफर्टिलिटी का एक कारण हो सकता है। जैसे कि क्लेमाइडिया स्त्रियों और पुरूषों के प्रजनन अंगों पर विपरीत प्रभाव डालता है।

दवाओं का दुष्प्रभाव भी प्रजनन क्षमता को क्षीण करता है। चिकित्सकों से परामर्श के बाद हर्बल बूटियों का प्रयोग किया जा सकता है। 

कंसीव न कर पाने की समस्या से निपटने के लिए अपनी छोटी छोटी आदतों पर भी ध्यान देना आवश्यक है, खास कर  अपने आहार का खास ख्याल रखकर। 

प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले आहार:

1. फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए फाइबर युक्त भोजन करें। 

2. नाश्ते को तवज्जो देना आवश्यक है।

3. एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन हितकारी है।

4 .इस समस्या से बचने के लिए मल्टीविटामिन्स का सेवन लाभकारी है।

5 .प्रोटीन की कमी न होने दें। 

6.  डेरी प्रॉडक्ट्स का सेवन करें।


क्या ना खाएं:

1 खराब वसा को प्रयोग में न लाएं।

2 अनरिफाईंड सोया उत्पादों का सेवन करने से बचें। 

3 अल्कोहोल का सेवन करने से बचें।

4 कैफीन युक्त चीज़ों का सेवन घातक हो सकता है।

5 अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन न करें।


उपर दिए गए  बिन्दुओं को ध्यान में रखना इस परेशानी से जुझने में मदद करता है। भारत जैसे देश जहाँ  2019 के फर्टिलिटी रेट में  2018 के मुकाबले गिरावट आई थी वहाँ यह जरूरी है कि प्रजनन संबंधी परेशानियों की अनदेखी न की जाए। सही पर परीक्षण करवाने से लाभ हो सकता है।

स्त्रियों के लिए परीक्षण:

प्रोजेस्टेरोन परीक्षण

हॉर्मोन परीक्षण

क्लेमाइडिया परीक्षण

थॉयरायड परीक्षण 

लैप्रोस्कोपी

हिस्टरॉसेलपिंगोग्राम

कंसीव न कर पाने वाली समस्या से जूझने वाली महिलाओं को अपना मानसिक व शारीरिक खास ख्याल रखना चाहिए क्योंकि डिप्रेशन से गुजरते वक्त माँ बनने की संभावना घटने लगती है।

परिवार का सहयोग:

हमारे समाज में जहाँ हर छोटी-बड़ी बातों पर एक औरत को आलोचना की कसौटी से गुज़रना पड़ता है वहाँ इस रोग से लड़ने की चुनौती सुरसा के मुख के समान विराट है। इसका 'श्रेय' कुछ सड़ी-गली मानसिकता को जाता है तो कुछ अनभिज्ञता को। हम अगर संवेदनशील रवैया अपना कर महिलाओं में  उर्जा का संचार करेंगे तो रास्ते उनके लिए थोड़े कम पथरीले होंगे। खासकर पतियों को अपनी पत्नियों को भरपूर भावनात्मक सहयोग देना चाहिए क्योंकि प्रजनन में  असफलता किसी भी महिला को आंतरिक पीड़ा देती है।

जागरूकता छोटी-छोटी आदतों से झलकती है और भोजन प्रणाली की ओर सजगता इस परिस्थिति को टालने में कारगर है।  संवेदनशील मन और स्वस्थ शरीर प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मेरुदंड की तरह कार्य करते हैं। 


समय की मांग यह है कि महिलाओं को अपने सपनों के साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी खूब ख्याल रखना चाहिए तथा इनफर्टिलिटी जैसी परिस्थिति में जागरूकता का परिचय देकर परामर्श अवश्य लेना चाहिए।


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